इस्लामाबाद: पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में गहराते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक तेल बाजार पर स्पष्ट रूप से दिखने लगा है। कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच पड़ोसी देशों में ईंधन की कीमतों को लेकर दो अलग-अलग तस्वीरें सामने आई हैं। जहाँ कंगाली की कगार पर खड़ा पाकिस्तान तेल की कीमतों में लगी आग से झुलस रहा है, वहीं नेपाल ने अपने नागरिकों को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कटौती कर राहत प्रदान की है। भारत में भी सरकार ने टैक्स ढांचे में बड़ा बदलाव किया है, हालांकि आम जनता के लिए कीमतों को स्थिर रखा गया है।

पाकिस्तान में हाहाकार: ₹399 के पार पहुँचा पेट्रोल

आर्थिक बदहाली का सामना कर रहे पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अब तक के उच्चतम स्तर के करीब पहुँच गई हैं। गुरुवार को जारी नई अधिसूचना के मुताबिक, पेट्रोल में 6.51 रुपये और हाई-स्पीड डीजल (HSD) में रिकॉर्ड 19.39 रुपये प्रति लीटर की भारी वृद्धि की गई है। इस बढ़ोतरी के बाद पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 399.86 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर हो गई है। डीजल की कीमतों में आए इस जबर्दस्त उछाल से वहां परिवहन और माल ढुलाई की लागत बढ़ना तय है, जिससे महंगाई का एक नया दौर शुरू हो सकता है।

नेपाल में राहत, लेकिन रसोई गैस और हवाई ईंधन महंगा

एक तरफ पाकिस्तान में कीमतें आसमान छू रही हैं, तो दूसरी तरफ नेपाल ऑयल कॉरपोरेशन ने आम जनता को राहत देते हुए पेट्रोल में 2 रुपये और डीजल में 12 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है। इस कमी के बाद नेपाल में पेट्रोल 214.50 रुपये और डीजल 222.50 रुपये प्रति लीटर (स्थानीय मुद्रा) की दर से मिलेगा। हालांकि, यह राहत रसोई तक नहीं पहुँच सकी है; नेपाल में एलपीजी सिलेंडर के दाम ₹150 बढ़कर ₹2160 हो गए हैं और एविएशन फ्यूल (हवाई ईंधन) की कीमतों में भी भारी इजाफा किया गया है।

भारत में टैक्स स्ट्रक्चर में बदलाव, पर नहीं बढ़े रेट

भारत में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने साफ किया है कि अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के बावजूद घरेलू उपभोक्ताओं पर बोझ नहीं डाला जाएगा। केंद्र सरकार ने 1 मई 2026 से प्रभावी होने वाले नए नियमों के तहत पेट्रोल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क ₹23 और डीजल पर ₹33 प्रति लीटर निर्धारित किया है। सरकार ने अतिरिक्त उत्पाद शुल्क को शून्य कर टैक्स के गणित को संतुलित किया है, जिससे खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। भारतीय महानगरों में पेट्रोल और डीजल के दाम अपने पुराने स्तर पर ही बरकरार हैं, जो वैश्विक संकट के बीच देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है।